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इस मंत्र को सुन कर थार-थार कापते है यमराज..

Mon, Feb 27th 2017 / 18:58:05 ऐतिहासिक धरोहर
इस मंत्र को सुन कर थार-थार कापते है यमराज..

आप के जहन मे कई बार सवाल आते होगे क्या मौत को टाला जा सकता है। क्या अल्प आयु को लम्बी आयु मे तबदील किया जा सकता हैं। एक ऐसा मंत्र है जो मृत्यु को टाल सका है अल्प आयु को दीर्घ आयु में बदल जा सकता हैं। जी हां महामृत्युजंय मंत्र एक ऐसा ही मंत्र है जो मौत की जगह लम्बी आयु का वरदान दे सकता है। आज दर्शको को ऐसे ही दुनिया के इकलौते महामृत्युजंय के दर्शन करा रहे है यह मंदिर मध्यप्रदेश के रीवा जिले में मौजूद है। जो करता है भक्तो का बेडा पार महामृत्युजय के दरबार में भक्त अपनी परेशानियो को लेकर आते है और इनकी कृपा से हस्ते हुये यहाँ से जाते है।

यह है मध्यप्रदेश के रीवा किला परिषर में मौजूद दुनिया का इकलौता महामृत्युंजय मंदिर। इस मंदिर में स्वयंभू महामृत्युजयं विराजते है। इनके वरदान से असाध्य रोगो से छुटकारा मिलता है यानि भय से निजाद मिलती है। ऐसा कहा जाता है कि महामृत्युजंय मंत्र के जप करने से अकाल मृत्यु टाल जाती है और अल्प आयु दीर्घ आयु मे बदल जाती है। इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहां अन्य शिवलिंगों की बनावट से बिल्कुल भिन्न 1001 छिद्र वाला शिवलिंग है। इस तरह का शिवलिंग विश्व के अन्य किसी भी मंदिर में देखने को नही मिलेगा। इस मंदिर मे भगवान शिव के रूप में महामृत्युंजय भगवान की अलौकिक शक्ति वाली अदभुद शिवलिंग मौजूद है।

महामृत्युजंय स्वयंभू है इनके सहस्त्र नेत्र है और इनकी महिमा अपरम पार है। वैसे तो इन्हे किसी भी वक्त याद किया जा सकता है लेकिन इनकी दिन में तीन बार पूजा और अभिषेक होता है। सुरज की किरणे निकलते ही सुबह पांच बजे, 12 बजे मंदिर बंद होते वक्त और शाम को आरती होती है। इन्हे बेलपत्त, नारियल, धतूरे, मदार के फूल और पत्ते चढाकर दूध ,दधी और शहद अर्पित कर आरती की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इन्हे र्दुगंध उक्त फूल और सामग्री अतिप्रिय है इसे चढाने से महामृत्युजंय अतिशीघ्र प्रसन्न हो जाते है। इन्हे 11 बेल पत्तो अथवा मदार के पत्ते में चंदन से ओम और राम लिखकर चढाया जाकर जाप और तप किया जाये तो ज्यादा प्रभाव होता है।

महामृत्युजंय के जाप से सर्व मनोकामना पूरी होती है इसी मान्यता के चलते श्रद्धालु दूर-दूर से महामृत्युंजय के दर्शन के लिए दौडे चले आते है। महामृत्युजंय का ऐसा प्रताप है कि भक्तो को अल्प समय मे ही फल की प्राप्त हो जाती है और इसी आस्था और विश्वास है प्रतिदिन भक्त माथा टेकने के साथ ही आते है। यूं हो सोमवार को यहां भक्तो की भीड उमडती है लेकिन एकदसी सावन सोमवार और विशेषकर शिवरात्रि, वंसत पंचमी मे लोग दूर दूर से आते है और मनमागी मूरादें पाते है।

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